जीवन में वस्तु का और
जीवन में जीवन का
अलग-अलग लोगों के लिये
अलग -अलग महत्व व प्रभाव है।
किसी के लिये दमड़ी ही लाखों हैं,
और किसी के लिये लाखों भी बेहिसाब हैं।
जीवन में पूर्णता
गिनती व मात्रा से कभी पूरी नहीं आती क्योंकि
श्रण भर में भी पूरा जीवन है और
कभी पूरे जीवन में अपने लिये श्रण भर का भी अभाव है।
तो जीओ ऐसे कि
यह श्रण अंतिम है इसी तथ्य से
पूर्णता को पा लो।
वरना रीते-रोते आये हो,
ऐसे ही जीवन बिताया है,
ऐसे ही मृत्यु को भी पा लो।
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