Saturday, October 14, 2017

भ्र्ष्टाचार का श्राप

जो जानता है 
और जिसने 
भ्र्ष्टाचार छुपाया है 
वह मरेगा बीच चौराहे 
सिपाहियों की गोली खाकर.... 
फिर भी न सोचो 
कि कभी कोई सच 
छिप पायेगा....  
सच तो सूर्य है 
अंधेरे की कितनी भी हो घनी चादर 
फाड़कर सामने एक दिन जरूर आयेगा 
फ़ाइलें फाड़ देने या 
जला देने से 
तुम्हारा कोढ़ छुप नहीं पायेगा 
गंगा मईय्या  की सौगंध -
यह श्राप है तुमको 
जिनके लिए तुमने ये पाप किया है न !
उन्हीं की घृणा के नीचे 
तुम्हारा वजूद 
एक दिन सिसकेगा 
और कराहेगा !
           ------             सुरेन्द्र  भसीन   

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