Friday, March 29, 2019

वहम

चैन का
शाँति का
विस्तार भी ऐसा होता है जैसे
बर्तन में पड़ा निश्छल दूध
वहम की एक बून्द पड़ते ही
फटता है
तार तार होता है...
       ----  सुरेन्द्र भसीन

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