Monday, August 3, 2015

काबलियत


जैसे हर तारा
एक-सा नहीं दमकता आकाश में,
हर फल एक-सा सुगठित नहीं होता,
हर फूल एक-सा सुंदर-खूबसूरत नहीं होता,
हर रचना भी महान नहीं हो सकती और 
हर नवजात एक-सी काबलियत लेकर नहीं पैदा होता
वैसे ही हरेक की तरह तुम्हें भी जन्मा है,भेजा है 
कुछ निष्चित विशेषताओं को लिये हुये ईश्वर ने इस संसार में
और समझो कि
महान आदमी के कोई सींग या पंख नहीं होते उघड़े हुये
मगर अंतर्रात्मा से 
वे एक खिले रूप होते हैं परिपक्व फूल की तरह,
आकाश में होते हैं पूरे अहसास की तरह,
फल होते हैं जीवन रस से लबालब और लबरेज,
और धरती पर पैदा होते-उतरते हैं 
एक धन्यवाद रूपी, प्रेम-प्रार्थना की तरह। 

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