अपनी
इस लंबी उम्ह्र तक आते- आते
तुम अपने बारे में क्या-क्या जानते हो ?
उतना,
जितना कि समाज ने बताया ?
याकि उतना जितना घटनाओं से टकराकर तुमने पाया।
अपने बारे में
अपने से छिपते तुम
अपने से छिपते तुम
स्वयं कब पूछोगे
और अपने आपको सम्पूर्णता से कब जानोगे ?
और अपने आपको सम्पूर्णता से कब जानोगे ?
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