Saturday, May 23, 2015



बच्चों के हाथों 
छूटी कागज की नाव बहती जाती नदी में … 
भला अपने अनुभवों को 
तट पर खड़े लोगों को 
वह कहाँ सुना पायेगी 
कि नदी कितनी गहरी है ?
कि नदी का पानी कितना ठंडा है ?

जब तक वह किनारे पहुँचेगी 
नदी के पानी में पसीजकर 
नदी का ही 
हिस्से बन जाएगी। 

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