खुद को संभाला है जबसे
अपने लिए मैंने हँसना और
रोना छोड़ ही दिया है तब से...
अपने सुखों से, दुखों से
तोड़ ही लिया है रिश्ता तब से...
बादलों-सी याद आती है उनकी तो
आँसू भी तिर आते हैं आँखों में
भूल से देख लेता हूँ उनका चेहरा कभी तो
खिली धूप-सी चमक छा जाती है चेहरे पे...
वरना तो सारे सम्बंधों से,हँसने से, रोने से
मैंने रिश्ता तोड़ ही लिया है याकि
अपने सुखों और दुखों पर
हँसना-रोना छोड़ दिया है।
------- सुरेन्द्र भसीन
अपने लिए मैंने हँसना और
रोना छोड़ ही दिया है तब से...
अपने सुखों से, दुखों से
तोड़ ही लिया है रिश्ता तब से...
बादलों-सी याद आती है उनकी तो
आँसू भी तिर आते हैं आँखों में
भूल से देख लेता हूँ उनका चेहरा कभी तो
खिली धूप-सी चमक छा जाती है चेहरे पे...
वरना तो सारे सम्बंधों से,हँसने से, रोने से
मैंने रिश्ता तोड़ ही लिया है याकि
अपने सुखों और दुखों पर
हँसना-रोना छोड़ दिया है।
------- सुरेन्द्र भसीन
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