Sunday, April 9, 2017

लालसा

लालसा 
हो सकता है 
यहाँ से जाने के बाद 
आकाश में तारे ही बन जाते हों 
हम सब लोग 
ऊपर, बहुत ऊपर जाकर 
आकाश में टिमटिमाते 
डबडबायी आँखों से 
नीचे झाँकते 
वापिस नीचे आने को आतुर 
लालायित फिर से 
अपना घर बसाने को 
अपनी गलतियाँ मिटाने को 
एक नया 
सुधरा जीवन पाने को।
 ------------                  -सुरेन्द्र भसीन  


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