Wednesday, October 14, 2015

गांधीजी के सहारे


गांधीजी ने कब कहा था ?
कि मेरा नाम नोटों पर छापो और 
मेरे नाम पर रिश्वत की चाँदी काटो या 
मेरे नाम पर देश और कौम को बाँटो। 
पर तुम्हें तो, 
ये सब कुकर्म किसी बड़े नाम की आड़ में करना ही था, जैसे  
अदालत में तुम धर्मग्रंथों की कसमें खाते हो 
और हुजूर-हुजूर करके बेशर्मी से झूठ बोलते जाते हो। 

तुम कितने गुनाह, कितने दुष्कर्म 
अपने धर्मग्रंथों की ओट में छुपाना चाहते हो 
मगर मौका मिलते ही फिर-फिर करते भी जाते हो। 

तुम चाहो या न चाहो 
ये पाप भी तुम्हारी नजायज संतान ही हैं जो 
पीछा करते एक न एक दिन 
तुम्हारे ही मुँह पर आयेंगे 
-और तुम्हारी आत्मा को कोचेंगे  
तुम्हारी ही देह चबायेंगे ।  

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