Thursday, June 6, 2019

मैं प्यासी धरती कई जन्मों से
मुझे अपने प्रेमजल से नहलाओ
मैं बंजर धरती हूँ
सनम बादल बनकर
मुझपर बरस जाओ
तुम हो श्याम कारे... कारे
घन.. घन घनघोर...गहरारे
मैं हूँ गोरी पनिहार
मेरे घट को भर दो
मेरा जीवन सम्पूर्ण करदो
मेरे अंग अंग को सहलाओ
मैं हूँ प्यासी धरती
मुझे प्रेमजल से नहलाओ
सनम बादल बनके मुझ पर
बरस बरस जाओ।
      -----    सुरेन्द्र भसीन

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