बचपन से
अपनी इस लम्बी उम्ह्र के पार आते -आते
इस श्मशान में लकड़ियाँ ढोते तुम
बुरी तरह सठियाने लगे हो और
हड्डियों को लकड़ियाँ और
लकड़ियों को हड्डियाँ बताने लगे हो।
अब आग में
लकड़ियों के झुलसने भर से तुम
जहां मौत के शोक में जाने लगे हो।
वहीं हड्डियों के आग में चटकने पर पगला कर
जलती चिता के इर्द-गिर्द नाच-नाच कर
लोहड़ी के गीत गाने लगे हो।
वैसे अनगिनत अपनों और बेगानों को
इन लकड़ियों के हवाले कर चुके तुममें
अब जीवन बचा ही कहाँ है,
तुम्हारी बीमार-बकराल देह को ढके ये कपड़े भी
जैसे कीकर की छाल बन चुके हैं
जो तुम्हारे मृत देह के साथ ही जलाये जायेंगे,
और धू -धू जलती चिता के गिर्द
लोग जलती हड्डियों का शोक नहीं
नाच-नाच कर लोहड़ी का गीत
नया ही गायेंगे।
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अपनी इस लम्बी उम्ह्र के पार आते -आते
इस श्मशान में लकड़ियाँ ढोते तुम
बुरी तरह सठियाने लगे हो और
हड्डियों को लकड़ियाँ और
लकड़ियों को हड्डियाँ बताने लगे हो।
अब आग में
लकड़ियों के झुलसने भर से तुम
जहां मौत के शोक में जाने लगे हो।
वहीं हड्डियों के आग में चटकने पर पगला कर
जलती चिता के इर्द-गिर्द नाच-नाच कर
लोहड़ी के गीत गाने लगे हो।
वैसे अनगिनत अपनों और बेगानों को
इन लकड़ियों के हवाले कर चुके तुममें
अब जीवन बचा ही कहाँ है,
तुम्हारी बीमार-बकराल देह को ढके ये कपड़े भी
जैसे कीकर की छाल बन चुके हैं
जो तुम्हारे मृत देह के साथ ही जलाये जायेंगे,
और धू -धू जलती चिता के गिर्द
लोग जलती हड्डियों का शोक नहीं
नाच-नाच कर लोहड़ी का गीत
नया ही गायेंगे।
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