Sunday, January 11, 2015

लघु कविताएँ

कान्हा के कुण्डल में 
हंसी हिलती है। 
उपवन मे यों कली खिलती है। 
प्रकृति में द्युति मिलती है। 
जीवन में ऐसे 
गति मिलती है। 

                    २ 
बहुत ऊँचे 
देवदार के वृक्षों के 
झुरमुट के  नीचे  से भी 
आकाश व प्रकाश 
मुश्किल से ही दिखता है। 

तरीकों से नहीं 
परमात्मा का तो 
भक्त की भक्ति 
से ही रिश्ता है। 





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