कान्हा के कुण्डल में
हंसी हिलती है।
उपवन मे यों कली खिलती है।
प्रकृति में द्युति मिलती है।
जीवन में ऐसे
गति मिलती है।
२
बहुत ऊँचे
देवदार के वृक्षों के
झुरमुट के नीचे से भी
आकाश व प्रकाश
मुश्किल से ही दिखता है।
तरीकों से नहीं
परमात्मा का तो
भक्त की भक्ति
से ही रिश्ता है।
हंसी हिलती है।
उपवन मे यों कली खिलती है।
प्रकृति में द्युति मिलती है।
जीवन में ऐसे
गति मिलती है।
२
बहुत ऊँचे
देवदार के वृक्षों के
झुरमुट के नीचे से भी
आकाश व प्रकाश
मुश्किल से ही दिखता है।
तरीकों से नहीं
परमात्मा का तो
भक्त की भक्ति
से ही रिश्ता है।
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