सुना है
वक्त नहीं है किसी के भी पास...
शहरों में वक़्त ज्यादा तेजी से
बीता जा रहा है
लोगों पर बुढ़ापा भी
जल्दी आ रहा है
वक़्त तेजी से
जिस्मों को खा रहा है
आदमी अंदर तक भुरभुराता
छीजता जा रहा है
जल्दी ख़त्म हुआ जा रहा है।
अपनी मौत से पहले मरा जा रहा है।
----- सुरेन्द्र भसीन
वक्त नहीं है किसी के भी पास...
शहरों में वक़्त ज्यादा तेजी से
बीता जा रहा है
लोगों पर बुढ़ापा भी
जल्दी आ रहा है
वक़्त तेजी से
जिस्मों को खा रहा है
आदमी अंदर तक भुरभुराता
छीजता जा रहा है
जल्दी ख़त्म हुआ जा रहा है।
अपनी मौत से पहले मरा जा रहा है।
----- सुरेन्द्र भसीन