Friday, September 22, 2017

लफ्जों की न कोई आवाज़ करो.... (गीत)

यूँ  ही रह जाने दो इन चुप्पियों को 
चाहत की न कोई आवाज़ करो 
न कुछ पूछो हमसे  
न कोई अपनी बात करो 
बह जाने दो इनको हमपर से 
लफ्जों की न कोई आवाज़ करो....   

ये बेलगाम बातें  
पहुँचाती नहीं कभी ठिकाने तक 
फिर हम  क्यों इनके आघात सहे 
शोर ही भरता  जाना है कानों में तो 
 क्यों कोई आवाज़ करे.... 
यूँ ही रह जाने दो इन चुप्पियों को 
लफ्जों की न कोई आवाज़ करें ?
        -----------           सुरेन्द्र भसीन 

Monday, September 18, 2017

बार बार..लगातार...

बार बार..लगातार...  

मैं 
तारकोल हूँ ?
रोड़ी-बजरी हूँ या 
कुछ और.... ?
यह मुझे तो नहीं मालूम मगर 
हर बार मैं ही राह बना दिया जाता हूँ.... 
झूठे वायदों,तरक्की व योजनाओं के 
भारी-भरकम ट्रकों की राहों की  
सड़क बना बिछा दिया जाता हूँ। 

मुझसे होकर ही 
वे गुजरते तो हैं 
मगर पता नहीं वे कहाँ जाते हैं ?
कम से कम मेरे काम तो 
वे नहीं आते हैं। 

जब-जब मैं 
टूट-फूट जाता हूँ,
उखड़ने लगता हूँ तब  
कुछ और मेरे जैसे आ जाते हैं,
मिला दिए जाते हैं-
रोड़ी बनाकर,बजरी बनाकर, तारकोल मिलाकर 
तरक्की, वायदों या योजनाओं की राहों में... 

सोचता हूँ मैं 
कि मेरे लिए यह समूचा वक़्त ही काला है 
या मैं काला ही जन्मा हूँ ?
जो खुद न कहीं आता हूँ 
न कहीं जाता हूँ 
मगर दूसरों के लिए सदा 
सड़क बना, 
उनकी सुविधा बना, 
तलुवों में बिछा दिया जाता हूँ 
बार बार... लगातार..... । 
             --------       सुरेन्द्र भसीन   














Saturday, September 9, 2017

बड़े की परिभाषा

आजकल किसी का
कुछ भी कहा 
किसी को भी
अच्छा  नहीं लगता
कोई कुछ सुनना नहीं चाहता।
सब चिड़चिड़ाए हैं और 
क्रोध में भरे हैं
अपने से खीझे
अपने से ही लड़े हैं। 
फिर कहते हैं हम
बड़े हैं .....
         ----------    -सुरेन्द्र भसीन

Monday, September 4, 2017

बचपने की बात

बच्चों को खेलते देखो तो
उनमें बड़े नज़र आते हैं
बचपन में भी बड़ों की तरह
प्रतियोगिता करते
छीनते-झपटते....

अगर बड़ों को व्यवहार करते देखो तो
उनमें बच्चे उभर आते हैं
टूटती चीजों पर बिसूरते और
बड़े होकर भी
बात-बात पर रूठते, नाराज होते
मनुव्वल  की इंतजार करते।

सारी उम्रह शिक्षा के बाद भी
हम बड़े नहीं हो पाते/होना चाहते
 हम बच्चे थे
हम बच्चें हैं
और हम बचपना छोड़ना नहीं चाहते।
                       -------------                       सुरेन्द्र भसीन